भोपाल, 7 जुलाई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान और प्रदेशवासियों के सहयोग से मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को प्रभावी रूप से लागू किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए नियम केवल नगरीय निकायों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सभी शासकीय विभागों में भी लागू किए गए हैं। इसके तहत शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे का भी एकीकृत रूप से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, इसमें हर नागरिक, संस्था और व्यावसायिक प्रतिष्ठान की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में ऐसी आदतों को शामिल करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि कचरे को खुले में फेंकने और जलाने से बचना होगा। घर, गली, मोहल्ले और शहर को स्वच्छ रखने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक परिवार अपने घर से निकलने वाले अपशिष्ट को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाली श्रेणियों में अलग-अलग कर अधिकृत संग्रहण वाहन को सौंपे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए घरों में जैविक खाद बनाने की आदत अपनानी चाहिए। पुराने कपड़े, पुस्तकें और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के स्थान पर स्थानीय पुन: उपयोग केंद्रों में जमा करने की अपील की गई। उन्होंने नागरिकों से बाजार जाते समय कपड़े का झोला और अपनी पानी की बोतल साथ रखने का आग्रह किया, ताकि एकल उपयोग वाली प्लास्टिक और अनावश्यक अपशिष्ट को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक घर, दुकान और झुग्गी बस्तियों से कचरा संग्रहण नियमित, समयबद्ध और बिना किसी बाधा के किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जनहित के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता सामूहिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और बेहतर जीवन का आधार है। आज पूरी जिम्मेदारी के साथ किए गए प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित मध्यप्रदेश प्रदान कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से "मेरा कचरा - मेरी जिम्मेदारी" के संकल्प को अपनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग देने का आह्वान किया।















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