संयुक्त राष्ट्र, 07 जुलाई।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर के देशों को नरसंहार और अन्य बड़े अत्याचारों को रोकने के लिए समय रहते सक्रिय होने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार बढ़ते संघर्ष, जवाबदेही की कमी और आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।
महासभा में अपनी 18वीं रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए गुटेरेस ने 'रेस्पॉन्सिबिलिटी टू प्रोटेक्ट' के संकल्प को आज के समय में अत्यधिक आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में दुनिया ने 120 से अधिक संघर्ष देखे हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है और खतरों को भांपने में अक्सर बहुत देर कर दी जाती है।
इस सिद्धांत के तहत प्रत्येक देश का कर्तव्य है कि वह अपनी जनता को युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराधों से बचाए। इसमें विफलता होने पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक भागीदारी अनिवार्य है। गुटेरेस ने सरकारों को हिंसा से पहले जोखिमों की पहचान करने और नागरिक समाज के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी है।
महासचिव ने स्वायत्त हथियारों, ड्रोन और ऑनलाइन फैल रही नफरत व दुष्प्रचार पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नयी तकनीकें बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा सकती हैं। शांति बहाली और मानवीय प्रयासों में इन खतरों के विरुद्ध ठोस उपाय शामिल करने की आवश्यकता है।
अंत में गुटेरेस ने कहा कि मजबूत संस्थान, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष मीडिया के बिना अत्याचार रोकना संभव नहीं है। हिंसा थमने के बाद भी शांति के लिए पीड़ितों को न्याय और संस्थागत सुधार बेहद जरूरी हैं। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और इस संकल्प को वैश्विक प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया।














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