भोपाल, 07 जुलाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं, दतिया उपचुनाव और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मूंग खरीदी, स्वास्थ्य व्यवस्था, कथित कागजी अस्पतालों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाब मांगा।
सिंघार ने कहा कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका दावा है कि पिछले वर्ष 15 से 18 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के मुकाबले केवल 7.65 लाख मीट्रिक टन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वर्ष भी 8.06 लाख मीट्रिक टन संभावित उत्पादन के मुकाबले 4.55 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में किसान प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 12 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने प्रत्येक किसान की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने, खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की। सिंघार ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिखा गया है।
प्रेसवार्ता के दौरान सिंघार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने इंदौर के खजराना क्षेत्र में कथित रूप से केवल कागजों में संचालित एक अस्पताल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में नशे के कारोबार की शिकायतों का भी जिक्र करते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सिंघार ने कांग्रेस की जीत का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त किए जाने के पीछे राजनीतिक कारण रहे हैं। उनका कहना था कि दतिया की जनता उपचुनाव में इसका जवाब देगी और कांग्रेस सीट पर जीत दर्ज करेगी।
प्रेसवार्ता में उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।















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