नई दिल्ली, 7 जुलाई।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने दुनिया भर में काम करने के तरीके को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया और सरकारी सेवाओं तक इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एआई रोजगार छीन लेगा या नए अवसर पैदा करेगा? इसका उत्तर न तो पूरी तरह सकारात्मक है और न ही पूरी तरह नकारात्मक।
विश्व आर्थिक मंच की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में एआई और ऑटोमेशन के कारण अनेक पारंपरिक नौकरियां प्रभावित होंगी, लेकिन इसके साथ ही डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग, एआई प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए रोजगार भी सृजित होंगे। अर्थात चुनौती रोजगार समाप्त होने की नहीं, बल्कि बदलते कौशल की है।
भारत जैसे युवा देश के लिए यह परिवर्तन अवसर भी है और चेतावनी भी। यदि शिक्षा व्यवस्था समय रहते डिजिटल कौशल, नवाचार और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर नहीं देती, तो बड़ी संख्या में युवा प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते हैं। दूसरी ओर, सही नीतियों और कौशल विकास के माध्यम से भारत वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
हालांकि एआई का उपयोग केवल आर्थिक प्रश्न नहीं है। इसके साथ निजता, डेटा सुरक्षा, गलत सूचना, कॉपीराइट और नैतिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दे भी जुड़े हैं। इसलिए तकनीक के विकास के साथ प्रभावी नियमन और पारदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक है।
एआई को रोजगार का शत्रु मानना उचित नहीं होगा। इतिहास बताता है कि हर तकनीकी क्रांति ने कुछ पुराने काम समाप्त किए हैं, लेकिन नए क्षेत्रों का भी निर्माण किया है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दें। भविष्य उसी का होगा जो नई तकनीक से डरने के बजाय उसे सीखकर अपनी क्षमता का विस्तार करेगा।













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