मेलबर्न, 09 जुलाई।
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 18 समझौतों पर मुहर लगाई है। मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद इन पहलों की घोषणा की गई।
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम आपूर्ति के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रबंधों को अंतिम रूप दिया है। भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में यह समझौता एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही, दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर भी तेजी से काम करने का संकल्प लिया है।
रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर, दोनों देशों ने संयुक्त रक्षा सहयोग के नवीनीकरण के साथ ही समुद्री सुरक्षा रोडमैप तैयार किया है। इसके अंतर्गत साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, आपदा राहत और सैन्य अंतर-संचालन क्षमता को और मजबूत किया जाएगा।
सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। ऑस्ट्रेलिया भारत की तीन प्राचीन कलाकृतियां—भगवान नंदी की मूर्ति, देवी भद्रकाली और भगवान कार्तिकेय की दुर्लभ प्रतिमाएं भारत को वापस लौटाएगा।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। भुवनेश्वर में खनन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना होगी, वहीं फ्लिंडर्स और विक्टोरिया विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलेंगे। इसके अतिरिक्त गांधीनगर में हरित ऊर्जा के लिए सौर प्रशिक्षण अकादमी का संचालन भी किया जाएगा।















