चंडीगढ़, 09 जुलाई।
हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालयों में कार्यरत अनुबंधित सहायक प्राध्यापकों की नौकरी को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने कवायद तेज कर दी है। उच्चतर शिक्षा विभाग ने राज्य के 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। समय सीमा के भीतर जानकारी न देने वाले कुलसचिवों को व्यक्तिगत रूप से विभाग के समक्ष पेश होना होगा।
विभाग ने प्रदेश के कुलसचिवों को भेजे रिमाइंडर में स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या का ब्यौरा देना होगा। इसमें फुल-टाइम और पार्ट-टाइम शिक्षकों की जानकारी के अलावा नियमित स्वीकृत पदों का विवरण भी शामिल है। सरकार इस कदम से सेवा सुरक्षा लागू होने पर सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय भार का सटीक आकलन करना चाहती है।
प्रशासन यह भी जानना चाहता है कि 50 हजार रुपये से कम मासिक वेतन पाने वाले शिक्षण और एचकेआरएन कर्मी किन अधिनियमों के दायरे में आते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालयों को प्रमाणित दस्तावेज और उचित तर्क पेश करने के लिए कहा गया है। यह सारी प्रक्रिया 'हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय अनुबंधित व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम, 2026' को तैयार करने के उद्देश्य से की जा रही है।
हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विजय मलिक ने कहा कि लंबे समय से चल रही मांग पर सरकार अब गंभीर दिख रही है। विभाग का यह ताजा निर्देश संकेत देता है कि इस कानून को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे हजारों अनुबंधित शिक्षकों के भविष्य को नई सुरक्षा मिल सकेगी।














