गोपेश्वर, 11 जुलाई।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) इन दिनों विवादों के भंवर में फंसी हुई है। मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब लैपटॉप, दान में मिले वाहनों और वीआईपी दर्शन शुल्क जैसे नए विवादों ने समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक दलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है और हर कोई निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल आयुक्त के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। पुलिस भी अपने स्तर पर छानबीन में जुटी है। इस बीच मंदिर समिति से 20 से 22 लैपटॉप गायब होने की बात सामने आई है। साथ ही, दान में प्राप्त एंबुलेंस और टेंपो ट्रैवलर वाहनों के रखरखाव को लेकर भी पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ऋषिकेश में किराए के कार्यालय पर हो रहे अनावश्यक खर्च को लेकर भी समिति आलोचकों के निशाने पर है।
विपक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूले जा रहे 1100 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क के लिए बोर्ड की विधिवत मंजूरी नहीं ली गई है। स्थानीय विधायक ने कपाट खुलने से अब तक आए पूरे चढ़ावे का ब्योरा जनता के सामने रखने की पुरजोर मांग की है। लोगों की धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए राजनीतिक संगठनों का कहना है कि यदि इन प्रकरणों की गहराई से जांच नहीं हुई तो आम जनमानस की श्रद्धा को गहरा आघात पहुंचेगा।
फिलहाल बीकेटीसी के फैसलों और प्रबंधन पर उठे इन सवालों के बीच शासन की ओर से गठित समिति की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। मंदिर समिति के लिए यह स्थिति न केवल प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है, बल्कि यह धार्मिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र भी बन गई है। उम्मीद है कि उच्चस्तरीय जांच से ही इन तमाम विवादों के पीछे की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी और मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही तय हो सकेगी।








