काठमांडू, 10 जुलाई।
नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व न्यायाधीशों और संवैधानिक पदाधिकारियों की संपत्ति जांच प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि इन पदाधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाए।
न्यायाधीश टेकप्रसाद ढुंगाना और श्रीकांत पौडेल की संयुक्त पीठ ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन पदाधिकारियों को हटाने के लिए केवल महाभियोग की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, उन्हें फिलहाल इस जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
न्यायालय ने इस मामले को पूर्ण पीठ के पास भेजने का निर्णय लिया है। जब तक पूर्ण पीठ का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक संपत्ति विवरण से संबंधित किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करने पर रोक रहेगी।
अदालत ने आयोग के अधिकार क्षेत्र और संवैधानिक औचित्य पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, यह आदेश सैन्य अधिकारियों और अन्य सामान्य लोगों पर संपत्ति जांच के मामले में प्रभावी नहीं होगा। अब पूर्ण पीठ ही इस पूरे प्रकरण की संवैधानिक व्याख्या तय करेगी।










