प्रयागराज, 18 जुलाई।
फतेहपुर के बहुचर्चित हत्याकांड मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने दिनेश चंद्र शुक्ला और उसके तीन साथियों की उम्रकैद की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा है। अदालत ने दोषियों की ओर से दायर आपराधिक अपील को सिरे से खारिज कर दिया है।
यह मामला 11 अक्टूबर 2008 का है, जब थाना किशुनपुर क्षेत्र में एक मकान के रजिस्ट्री सौदे को लेकर विवाद चल रहा था। मृतक भूरा सिंह अपने बेटे और भाई के साथ समझौते के लिए पहुंचे थे। तभी हथियारबंद दिनेश चंद्र शुक्ला, अखिलेश चंद्र शुक्ला, अनिल कुमार शुक्ला और सुनील कुमार शुक्ला ने वहां पहुंचकर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी, जिसमें भूरा सिंह की मौके पर ही जान चली गई।
बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष एफआईआर के समय, गवाहों की उपस्थिति और बैलिस्टिक रिपोर्ट में विसंगतियों के कई तर्क दिए, लेकिन उच्च न्यायालय ने सभी दलीलों को निराधार मानकर खारिज कर दिया। अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों को पूरी तरह विश्वसनीय माना है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए दोषियों की सजा को धारा 302/34 के तहत बरकरार रखा। जमानत पर चल रहे सभी दोषियों की जमानत रद्द कर दी गई है और उन्हें तत्काल प्रभाव से जेल भेजने का निर्देश दिया गया है।












