प्रयागराज, 18 जुलाई।
सोनभद्र के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपित अशोक शर्मा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने गर्भवती महिला सुनीता शर्मा और उसकी तीन वर्षीय मासूम बेटी की निर्मम हत्या के मामले में अशोक शर्मा को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अपील की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए निरस्त कर दिया और आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
यह घटना 21 दिसंबर 2010 को चोपन थाना क्षेत्र में हुई थी। मृतका के पिता सतीश कुमार शर्मा ने अपनी बेटी और नतिन की हत्या के बाद अवैध संबंधों का आरोप लगाया था। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरोपी को केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर फंसाया गया है। कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि कथित प्रत्यक्षदर्शी गवाहों का व्यवहार पूरी तरह अप्राकृतिक था और उनके बयानों में गंभीर विरोधाभास मौजूद थे। अभियोजन पक्ष आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी का कोई भी स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि कथित गवाहों ने हत्या होते हुए देखने का दावा तो किया, लेकिन न तो उन्होंने शोर मचाया और न ही किसी को सूचना दी, जो सामान्य मानवीय आचरण के विपरीत है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फंदे के निशान न मिलना गवाहों के दावों को झूठा साबित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है, जिसके चलते आरोपी को निर्दोष मानते हुए रिहा किया गया है।











