शिवपुरी, 18 जुलाई।
ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की दुर्लभ तोप चोरी होने के मामले में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि रात के समय किले की सुरक्षा में तैनात गार्ड मौके से नदारद थे और बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी उन्होंने सुनाई थी, वह पूरी तरह मनगढ़ंत निकली।
राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को घटनास्थल से कई अहम सुराग मिले हैं। इनमें तोप को घसीटने के निशान, लोहे के पाइप और पिछले दुर्गम रास्ते पर भारी वाहन के टायरों के निशान शामिल हैं। इससे साफ होता है कि यह चोरी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह का सुनियोजित कारनामा है।
सुरक्षा में तैनात गार्ड बालकिशन और शरणलाल ने अपनी लापरवाही स्वीकार कर ली है। जांच में पता चला कि 4-5 जुलाई को भी बदमाशों ने तोप गिराने की कोशिश की थी, लेकिन तब गार्डों ने इसकी सूचना दी थी जिस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बार चोरों ने बेयरिंग वाली ट्रॉली का इस्तेमाल कर करीब 3,500 किलो वजनी तोप को 3,000 फीट नीचे उतार लिया।
किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड नियुक्त हैं, लेकिन घटना वाली रात दोनों नाइट गार्ड ड्यूटी से गायब थे। अब वहां केवल 13 तोपें ही बची हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अष्टधातु से निर्मित इस ऐतिहासिक तोप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है। पुलिस अब साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपियों और इस्तेमाल हुए वाहन की तलाश में जुटी है।












