लखनऊ, 18 जुलाई।
उत्तर प्रदेश विधान सभा के संदर्भ पुस्तकालय में शुक्रवार को एक अत्यंत ज्ञानवर्धक पहल के तहत गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खंडों के वाङ्मय की स्थापना की गई। इस पावन अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ऋषि का यह सद्साहित्य केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में उतारने और आत्मसात करने के लिए है। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान का भंडार व्यक्ति के चरित्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि इस अद्भुत वाङ्मय में जीवन के हर पहलू को गहराई से छूने वाले विषयों का संग्रह है, जो समाज को संस्कारित करने की शक्ति रखता है। इस साहित्य को शशी गंगवार और देवेंद्र सिंह गंगवार ने अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में पुस्तकालय को समर्पित किया है। इस विशेष अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष को अखण्ड ज्योति पत्रिका भी भेंट की गई, जिसे बाद में वहां मौजूद सभी कर्मचारियों और गणमान्य व्यक्तियों को वितरित किया गया।
वाङ्मय स्थापना अभियान के प्रमुख संयोजक उमाशंकर शर्मा ने इस दौरान कहा कि युगऋषि का यह साहित्य समाज को नैतिक मूल्यों और सकारात्मक चिंतन की नई दिशा देने में सक्षम है। इस कार्यक्रम में विधान सभा के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि उमाशंकर शर्मा, देवेंद्र सिंह गंगवार, शशी गंगवार, रुचि सिंह, सावित्री शर्मा, वी.के. श्रीवास्तव एवं प्रेम सिंह यादव समेत कई प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।












