नई दिल्ली, 1 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में नोएडा निवासी रुचिका सिंह के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना भेज दिया गया है। हालांकि शुक्रवार शाम तक मामला संबंधित थाने को औपचारिक रूप से नहीं मिला था।
नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने कहा कि जैसे ही मामला उनके पास पहुंचेगा, उसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की थी। प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत दर्ज की गई। जीरो एफआईआर के तहत किसी भी थाने में शिकायत दर्ज कर आगे संबंधित क्षेत्र में भेजा जा सकता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची। शिकायत के अनुसार इन टिप्पणियों का उद्देश्य नफरत फैलाना और सार्वजनिक शांति प्रभावित करना था।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि 25 वर्षीय युवती के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई उचित नहीं है। उनका कहना था कि पुलिस को अपनी ऊर्जा अन्य मामलों पर लगानी चाहिए।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार युवाओं के खिलाफ इसका अलग तरह से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
यह मामला जंतर-मंतर पर चले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था।
इसके बाद प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट व्यापक रूप से साझा किए जाने लगे। कई मामलों में महिलाओं की निजी जानकारी सार्वजनिक करने, बलात्कार और जान से मारने की धमकियां देने जैसी घटनाएं सामने आईं।
शुक्रवार को एक एक्स उपयोगकर्ता, जिसने स्वयं को भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया इकाई का सह-संयोजक बताया, ने तीन महिलाओं का वीडियो साझा करते हुए उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
एक अन्य एक्स खाते ने जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा का वीडियो साझा कर उनके खिलाफ कार्रवाई की अपील की। इस खाते से 23 जुलाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर उनकी पहचान सार्वजनिक करने तथा कार्रवाई की मांग की गई।
कई अन्य गुमनाम खातों ने भी प्रदर्शनकारियों के वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए उन पर प्रधानमंत्री, सेना का अपमान करने या प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमला करने जैसे आरोप लगाए। कुछ मामलों में फोन नंबर और पते जैसी निजी जानकारी भी सार्वजनिक की गई तथा पोस्ट पर अभद्र टिप्पणियां की गईं।
19 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी वाला वीडियो सामने आने के बाद उसने धमकियों और निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के डर से अपने सभी सोशल मीडिया खाते हटा दिए हैं।
डिजिटल अधिकार विशेषज्ञ अपराजिता भारती ने कहा कि भारत में निजी जानकारी सार्वजनिक कर उत्पीड़न करने की घटनाओं को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं हैं। उनके अनुसार यह ऑनलाइन उत्पीड़न का सामान्य माध्यम बनता जा रहा है, लेकिन कानून में इसकी स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक और अवैध अभिव्यक्ति को अक्सर एक जैसा मान लिया जाता है। यदि किसी को यौन हिंसा की धमकी दी जाती है तो उस पर कार्रवाई संभव है, लेकिन केवल निजी जानकारी साझा किए जाने को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं हैं। ऐसे मामलों में साइबर प्रकोष्ठ संबंधित मंचों से सामग्री हटाने का अनुरोध कर सकते हैं।














