उज्जैन, 3 अगस्त।
श्रावण मास के पहले सोमवार पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से आज भगवान महाकाल की पहली शाही सवारी निकलेगी। इस दौरान भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच पूरी धर्मनगरी शिवभक्ति में सराबोर रहेगी।
श्रावण और भाद्रपद मास में निकलने वाली छह पारंपरिक सवारियों में यह पहली सवारी होगी। इस वर्ष पहली सवारी 3 अगस्त को और अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। परंपरा के अनुसार दोपहर 3:30 बजे सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का विशेष पूजन होगा। इसके बाद शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से सवारी रवाना होगी। करीब डेढ़ किलोमीटर का मार्ग तय कर शाम लगभग 5 बजे रामघाट पहुंचेगी, जहां शिप्रा नदी के पवित्र जल से अभिषेक, पूजन और आरती होगी। इसके बाद सवारी शाम करीब 7 बजे मंदिर लौटेगी।
महाकाल की पालकी महाकाल मंदिर से निकलकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वापसी में रामघाट, रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी।
रामघाट पर भगवान महाकाल का जलाभिषेक और महाआरती होगी। वहीं गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन का दिव्य दृश्य श्रद्धालुओं को देखने मिलेगा। सवारी के दौरान सशस्त्र पुलिस बल पारंपरिक गार्ड ऑफ ऑनर भी देगा।
महाकाल मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। सभी आरतियों में कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से चलित आरती दर्शन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक सवारी में जनजातीय सांस्कृतिक दल प्रस्तुति देंगे और पांच एलईडी रथ आकर्षण का केंद्र रहेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमों की तैनाती के साथ 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। सुरक्षा, यातायात और साफ-सफाई के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
श्रावण के पहले सोमवार तड़के भस्म आरती विशेष धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक और पूजन हुआ।
भगवान महाकाल का भांग, चंदन, रुद्राक्ष, रजत आभूषणों, पुष्पमालाओं और शेषनाग के रजत मुकुट से भव्य शृंगार किया गया। भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन कर फल एवं मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म समर्पित की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं। पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष गूंजते रहे।












