नैनीताल, 17 सितंबर।
खगोल प्रेमियों के लिए 18 से 22 सितंबर तक का समय खास रहने वाला है। इस दौरान शुक्र ग्रह अपनी अधिकतम चमक के दौर में दिखाई देगा। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज की ओर देखने पर इसे नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अवधि में शुक्र की चमक करीब -4.8 मैग्नीट्यूड तक पहुंच सकती है। यह रात के आकाश के सबसे चमकीले तारों में शामिल सीरियस से लगभग 20 गुना अधिक चमकीला दिखाई दे सकता है।
सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी दिशा में देखने पर शुक्र आकाश में सबसे चमकीले बिंदु के रूप में नजर आएगा। मौसम साफ रहने पर इसे घर की छत से भी बिना टेलीस्कोप या दूरबीन के देखा जा सकेगा।
एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक वीरेंद्र यादव के अनुसार, शुक्र की चमक का अध्ययन करने के साथ इस दौरान उसके वायुमंडल और बादलों की परतों का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
शुक्र को पृथ्वी की ‘जुड़वां बहन’ कहा जाता है, क्योंकि इसका आकार और द्रव्यमान पृथ्वी के समान है। हालांकि, इसका वातावरण बेहद घना है और इसमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड तथा सल्फ्यूरिक एसिड के बादल पाए जाते हैं।
शुक्र की सतह का तापमान करीब 475 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है। वैज्ञानिकों के लिए यह विषय अब भी महत्वपूर्ण है कि पृथ्वी के समान आकार और द्रव्यमान वाला ग्रह इतना गर्म और जीवन के लिए प्रतिकूल कैसे बन गया।
शुक्र की अधिकतम चमक का यह दौर उसके वातावरण और अन्य विशेषताओं के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
















