कोरबा, 17 सितंबर।
कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत ने गुरुवार को कोरबा प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता के दौरान जिले के विकास और जनहित से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, ईएसआईसी अस्पताल, डीएमएफ राशि, सड़क और यातायात व्यवस्था, रेलवे सुविधाओं, भू-विस्थापितों, रोजगार, प्रदूषण और पर्यटन विकास को लेकर अपनी बात रखी।
सांसद ने कहा कि कोरबा के साथ गोरेला, पेण्ड्रा और मरवाही में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
कोरबा के ईएसआईसी अस्पताल को लेकर उन्होंने कहा कि यह फिलहाल रेफरल सेंटर तक सीमित होकर रह गया है। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य पद खाली हैं। इन रिक्तियों की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद भी भर्ती नहीं होने की बात कहते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से गंभीर पहल की मांग की।
डीएमएफ राशि के उपयोग पर सांसद ने कहा कि जिले में इस फंड का अधिक से अधिक लाभ सीधे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों, उपनगरों और ग्रामीण इलाकों की खराब सड़कों को भी उन्होंने चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को दिशा समिति की बैठक में कलेक्टर के सामने सड़क संबंधी विषय रखा गया था। बैठक में सड़क सुधार और नए निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने का निर्णय लिया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क मरम्मत और जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की बात भी सामने आई।
प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में शुभकामनाएं देने के साथ जनता को सवाल पूछने का अधिकार भी है। महंगाई, रोजगार, पेट्रोल-डीजल की कीमत, किसानों और आम लोगों की समस्याओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
भू-विस्थापितों के मुद्दे पर उन्होंने हसदेवबांगर, अमगांव, चुईली, पाली और पड़निया सहित कई गांवों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों की जमीन एसईसीएल ने ली है, लेकिन मुआवजा, नौकरी और बसाहट से जुड़ी मांगों का समाधान अभी अपेक्षित है।
उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों के मकान तब तक नहीं तोड़े जाएं, जब तक उन्हें बसाहट उपलब्ध नहीं करा दी जाती। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित हुए 15 से 20 वर्ष हो चुके हैं, उन्हें वर्तमान दर के आधार पर मुआवजा देने की मांग भी उन्होंने रखी।
एसईसीएल के मेडिकल रूप से अनफिट कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी नहीं मिलने का मुद्दा भी सांसद ने उठाया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से एसईसीएल मेडिकल बोर्ड की बैठक नहीं होने के कारण कर्मचारियों को परेशानी हो रही है।
बड़ी ठेका कंपनियों में स्थानीय बेरोजगारों और भू-विस्थापित परिवारों के सदस्यों को रोजगार देने की मांग भी उन्होंने दोहराई। सांसद ने बताया कि एसईसीएल से संबंधित विषय कोयला मंत्री और चेयरमैन के सामने भी रखा गया है।
कोरबा के आसपास मौजूद धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कनकी, चैतुरगढ़, कुदुरमाल, मड़वारानी, अनुग्रहगड़ी, कोसगई और मातिन दाई सहित अन्य स्थलों के विकास के प्रयासों का उल्लेख किया।
रेल सुविधाओं के संबंध में सांसद ने कोरबा, चिरमिरी, अंबिकापुर और बिलासपुर की यात्री सुविधाओं, रेल विस्तार और नई यात्री ट्रेनों के संचालन की मांगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोविड काल से बंद ट्रेनों को दोबारा चलाने की मांग जीएम, डीआरएम और रेल मंत्री तक पहुंचाई गई है।
कोरबा की यातायात समस्या पर उन्होंने सुनालिया अंडरब्रिज का निर्माण लंबे समय से लंबित होने की बात कही। 16 सितंबर की दिशा समिति की बैठक में कलेक्टर से इस मामले में उचित पहल करने को कहा गया है।
प्रदूषण के विषय में सांसद ने दीपका में डस्ट सप्रेसिंग मशीन के जरिए सड़कों से उड़ने वाली धूल कम करने के प्रयास की जानकारी दी। कोरबा के बाद मनेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की दिशा में रास्ता साफ होने को भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि कोरबा मेडिकल कॉलेज में स्नातकोत्तर के साथ एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। उनका प्रयास लोकसभा क्षेत्र के तीन जिलों में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना है।
सांसद ने कहा कि कोरबा के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सभी पक्षों को राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने 16 सितंबर को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें यातायात व्यवस्था, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और सुधारात्मक कार्यों में तेजी लाने से जुड़े विषय उठाए गए थे।
















