नई दिल्ली, 06 अक्टूबर।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर विकास दर का अनुमान बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत के पिछले अनुमान से बढ़कर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। इसके पीछे उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधियां, मजबूत घरेलू मांग और निर्यात को प्रमुख आधार बताया गया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अल नीनो की स्थिति और शेयर बाजार में संभावित गिरावट से पूंजी प्रवाह में अस्थिरता का जोखिम बना रह सकता है। घरेलू मांग और निर्यात को आगे भी आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन माना गया है। रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारत की उत्पादकता और विकास को गति देने वाला नया माध्यम बताया गया है। देश में एआई क्षेत्र में निजी निवेश 2024 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 4.1 अरब डॉलर हो गया, जबकि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों में रोजगार 19 लाख से बढ़कर 23.6 लाख पेशेवरों तक पहुंच गया।
भारत को एआई की क्षमता का व्यापक लाभ उठाने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कारोबारी माहौल बेहतर बनाने, एआई तक पहुंच बढ़ाने और कुशल श्रमबल तैयार करने की जरूरत बताई गई है। भारत को एआई के लिए तैयार उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष 10 देशों में शामिल बताया गया है। एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ाने और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की संभावनाएं हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था और रोजगार पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए तकनीकी बदलाव के दौर में कर्मचारियों को सहयोग देने के साथ एआई के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया का सबसे तेज गति से बढ़ने वाला क्षेत्र बना रहेगा।














