वियना/जिनेवा, 07 अक्टूबर।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक बार फिर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाकर भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। वियना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जल संगोष्ठी के दौरान पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस संधि के तहत पानी के प्रवाह को रोकने के किसी भी प्रयास के गंभीर क्षेत्रीय परिणाम हो सकते हैं। इसी क्रम में, जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में पाकिस्तान के प्रथम सचिव अदील मुमताज खोखर ने भी भारत के इस कदम को जल को हथियार बनाने की संज्ञा दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साझा जल संसाधनों का इस्तेमाल कतई राजनीतिक दबाव बनाने, कूटनीतिक लाभ हासिल करने या युद्ध के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान का यह भी दावा है कि सिंधु नदी का जल उसके 25 करोड़ से अधिक नागरिकों के जीवन और आजीविका का मुख्य आधार है, इसलिए इस्लामाबाद अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, भारत ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि क्षेत्र में आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के मद्देनजर ही इस जल समझौते को स्थगित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय बैठकों में पाकिस्तान द्वारा लगातार इस मुद्दे को तूल देने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहराता हुआ नजर आ रहा है, जहां एक तरफ पाकिस्तान इसे मानवाधिकार और साझा जिम्मेदारी मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा प्राथमिकताओं पर अडिग है।














