मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की करीब 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। इसके दस सिर हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदोदरी नामदेव समाज से थीं। इसी वजह से इस समाज की महिलाएं प्रतिमा के सामने से गुजरते समय घूंघट डाल लेती हैं। हालांकि, रावण का मंदसौर से यह संबंध होने का कोई प्रमाणिक ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं बताया जाता है।
दशहरे पर होती है विशेष पूजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, दशहरे के दिन नामदेव समाज के लोग प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद राम और रावण की सेनाओं की झांकियां निकाली जाती हैं। रावण वध से पहले लोग प्रतिमा के सामने खड़े होकर क्षमा मांगते हैं और कहते हैं कि सीता माता के हरण के कारण राम की सेना उसका वध करने आई है।
प्रतिमा के एक सिर पर गधे का सिर भी बनाया गया है, जिसे सीता हरण के बाद रावण की बुद्धि भ्रष्ट होने का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, रावण वध से पहले प्रतिमा स्थल पर अंधेरा किया जाता है और फिर रोशनी होने पर राम की सेना उत्सव मनाती है।
बीमारी से मुक्ति और संतान सुख की मान्यता
स्थानीय मान्यता है कि रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधने से बीमारी से बचाव होता है। इसी विश्वास के चलते महिलाएं दशहरे सहित अन्य अवसरों पर प्रतिमा के पैर में धागा बांधती हैं। कई महिलाएं संतान सुख की कामना से भी मन्नत मांगती हैं। नगर पालिका ने हाल ही में प्रतिमा का रंग-रोगन भी कराया है।














