उज्जैन, 23 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में आगामी सिंहस्थ-2028 के भव्य आयोजन से पहले विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए नेशनल सेक्यूरिटी एजेंसी (एनएसजी) द्वारा एक विशेष मॉकड्रिल आयोजित की गई। रात के सन्नाटे में आधुनिक हथियारों से लैस एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज ने मंदिर परिसर और महाकाल लोक क्षेत्र में किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने का गहन अभ्यास किया।
महाकाल मंदिर परिसर में गुरुवार देर रात 11 बजे प्रारंभ हुआ यह मॉक ऑपरेशन रात दो बजे तक निरंतर चलता रहा। लगभग तीन घंटे तक चले इस सुरक्षा अभ्यास में एक काल्पनिक आतंकवादी हमले की स्थिति बनाकर सुरक्षा तैयारियों की गहराई से समीक्षा की गई। इस पूरे ऑपरेशन में 100 से अधिक एनएसजी कमांडो के साथ-साथ एटीएस, स्थानीय पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें भी शामिल रहीं।
रात करीब 11 बजे महाकाल मंदिर के नीलकंठ द्वार और नंदी द्वार के समीप अचानक गतिविधियां तेज हो गईं। अभ्यास के नियमों का पालन करते हुए पूरे इलाके को खाली करा दिया गया और लाइटें बंद कर दी गईं। इसके तुरंत बाद अत्याधुनिक शास्त्रों तथा उन्नत सुरक्षा उपकरणों से लैस एनएसजी के जवान मोर्चे पर डट गए और तड़के दो बजे तक चले इस अभियान में आपात स्थिति से निपटने की हर तैयारी को परखा गया।
इस मॉक ड्रिल के माध्यम से महाकाल लोक के मानसरोवर क्षेत्र से लेकर त्रिनेत्र कंट्रोल रूम तक के विस्तृत इलाके में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया गया। किसी भी संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में त्वरित जवाबी कार्रवाई, खतरे को तुरंत नाकाम करने, श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का अभ्यास किया गया। साथ ही प्रवेश-निकास रास्तों और इमरजेंसी एग्जिट की उपयोगिता को भी जांचा गया।

इस बहुएजेंसी अभ्यास में 100 से अधिक एनएसजी कमांडो के अतिरिक्त एटीएस, थाना महाकाल, महाकाल लोक थाना पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से शामिल हुए। सभी संबंधित विभागों ने काल्पनिक खतरे के परिदृश्य के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया।
वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले धार्मिक मेले सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर महाकाल मंदिर और महाकाल लोक की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है। अभ्यास के दौरान मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों और आपातकालीन रास्तों की क्षमता परखी गई, ताकि संकट के समय न्यूनतम समय में भक्तों को सुरक्षित निकाला जा सके।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर के सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के साथ मिलकर यह संयुक्त मॉक ड्रिल की गई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किसी भी अप्रत्याशित खतरे के समय विभिन्न सुरक्षा इकाइयां कितनी त्वरित प्रतिक्रिया देती हैं और उनके बीच का तालमेल कितना सटीक रहता है।














