मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय कालगणना के सूत्रधार और न्याय के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा अब काशी की पावन धरती पर जीवंत रूप में प्रस्तुत होगी। उन्होंने बताया कि बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, पराक्रम और न्यायप्रियता को केंद्र में रखकर भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिससे देश के इतिहास और सांस्कृतिक वैभव को नई ऊर्जा मिलेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि 3 से 5 अप्रैल 2026 तक वाराणसी के बीएलडब्ल्यू मैदान में त्रिदिवसीय कार्यक्रम आयोजित होगा। इस आयोजन में महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा, जो भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा को मंच पर सजीव करेगा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित की जाएगी, जो भारतीय परंपरा और समय गणना की वैज्ञानिकता का प्रतीक होगी। साथ ही उन्होंने उज्जैन की अवंतिका भूमि पर वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और अलौकिक बनाने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम सांस्कृतिक नवजागरण का आधार बनेगा और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ेगी।











