रोम, 23 अप्रैल।
फुटबॉल विश्व कप में ईरान की जगह इटली को शामिल करने के प्रस्ताव ने इटली में खास उत्साह पैदा नहीं किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत पाओलो जाम्पोली द्वारा दिया गया यह सुझाव वहां के खेल जगत और प्रशंसकों के बीच अधिक प्रभाव नहीं छोड़ पाया, बल्कि इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है।
जाम्पोली ने यह प्रस्ताव अमेरिका के राष्ट्रपति और फीफा अध्यक्ष के समक्ष रखने की बात कही थी। उन्होंने तर्क दिया कि चार बार की विश्व चैंपियन इटली को इस तरह के टूर्नामेंट में शामिल देखना उनके लिए सपना होगा, हालांकि उनका इस प्रतियोगिता या इटली फुटबॉल से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
इटली के खेल मंत्री आंद्रेया अबोदी ने इस विचार को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि यह न तो संभव है और न ही उचित, क्योंकि विश्व कप में जगह प्रदर्शन के आधार पर मिलती है। वहीं, अर्थव्यवस्था मंत्री जियानकार्लो जियोर्जेट्टी ने इस सुझाव को शर्मनाक बताया।
फुटबॉल विशेषज्ञ जियानी डी बियासी ने भी इसे अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि यदि किसी टीम की जगह खाली होती है तो उसे उसी समूह की अगली टीम से भरा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इटली को इस तरह के समर्थन की आवश्यकता नहीं है।
फीफा ने भी संकेत दिया कि ईरान की भागीदारी तय है और टीम को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन का मानना है कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।
वर्तमान में ईरान के हटने या प्रतिबंधित होने की कोई स्थिति नहीं है। ईरान पहले ही लगातार चौथी बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर चुका है। वहीं इटली लगातार तीसरी बार विश्व कप से बाहर रहा है।
टूर्नामेंट जून में शुरू होना है, जिसमें ईरान की टीम अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हिस्सा लेने की तैयारी में जुटी है।








.jpg)
