कानपुर, 01 अप्रैल।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी), वडोदरा के बीच बुधवार को शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सहयोग मुख्य रूप से परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखकर किया गया है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में शोध और कौशल विकास को सुदृढ़ करना है।
समझौते पर हस्ताक्षर आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल और जीएसवी कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने किए। इस अवसर पर प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी परिवहन और लॉजिस्टिक्स में उन्नत शोध, नवाचार और कौशल विकास को नई दिशा प्रदान करेगी, जिससे स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
सहयोग के तहत जीएसवी के स्नातक छात्रों को आईआईटी कानपुर की उन्नत प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही रेलवे अनुसंधान और अन्य परिवहन क्षेत्रों में संयुक्त शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। रेल, सड़क, वायु और समुद्री परिवहन के साथ-साथ अंतरदेशीय जलमार्गों में भी एकीकृत अनुसंधान और डिजाइन गतिविधियां संचालित होंगी।
आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विजन के उपयोग से स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि इस पहल से न केवल स्वदेशी तकनीकों का विकास होगा, बल्कि यात्रा की गति, सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। इसके साथ भारत में विकसित उत्पादों और सेवाओं के निर्यात के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
साझेदारी के अंतर्गत संकाय विनिमय कार्यक्रम और छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी, जिससे प्रशिक्षण वैश्विक मानकों तक पहुंचे। यह कदम प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अवसर पर प्रो. तरुण गुप्ता, प्रो. योगेश सिंह चौहान और प्रो. दीपु फिलिप भी मौजूद रहे।











