धार, 06 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में सोमवार को फिर सुनवाई हुई, जिसमें करीब दो घंटे तक इस संवेदनशील मामले पर विस्तृत बहस चली। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों के साथ कई अहम पहलुओं को अदालत के सामने रखा।
कार्यवाही के दौरान इतिहास, पुरातात्विक प्रमाणों और प्रशासनिक अभिलेखों को लेकर अदालत में गहन चर्चा देखने को मिली। हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखते हुए भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला और कई महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए।
बहस के दौरान हिंदू पक्ष ने विशेष रूप से दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख करते हुए उस समय इस स्थल के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों और संदर्भों के आधार पर यह दावा किया गया कि यह स्थल प्राचीन काल से ही हिंदू आस्था से जुड़ा रहा है।
इसके अतिरिक्त वर्ष 1935 में भोजशाला परिसर में लगाए गए एक बोर्ड को भी बहस का प्रमुख आधार बनाया गया। हिंदू पक्ष ने इसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह दर्शाने का प्रयास किया कि उस समय प्रशासनिक स्तर पर भी इस स्थल की पहचान को लेकर स्पष्ट संकेत मौजूद थे।




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