संपादकीय
22 Apr, 2026

ऊर्जा सुरक्षा की नई राह: विकल्पों की तलाश

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारत में भंडारण तकनीकों के विविध विकल्पों जैसे पंप्ड स्टोरेज, सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन को अपनाने तथा नीतिगत स्तर पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

22 अप्रैल।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा आज केवल उत्पादन बढ़ाने का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम उत्पन्न ऊर्जा को कितनी सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से संचित कर पाते हैं। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएं अब पहले जैसी स्थिर नहीं रहीं। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध और संसाधनों पर नियंत्रण की राजनीति ने ऊर्जा क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह अपनी ऊर्जा भंडारण रणनीति पर पुनर्विचार करे।
वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लेकिन इस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व इतना व्यापक है कि तकनीक, उत्पादन और कच्चे माल—जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकेल—की आपूर्ति तक उसी के नियंत्रण में है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और प्रतिबंधों ने यह दिखा दिया है कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता किस प्रकार जोखिम पैदा कर सकती है। भारत भी इस प्रतिस्पर्धा के दुष्प्रभावों से अछूता नहीं रहा है।
ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि भारत बैटरी आधारित भंडारण पर अपनी निर्भरता सीमित करे और वैकल्पिक उपायों को प्राथमिकता दे। पंप्ड स्टोरेज एक पारंपरिक लेकिन प्रभावी विकल्प है, जिसमें अतिरिक्त बिजली का उपयोग पानी को ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर उसी पानी से बिजली उत्पन्न की जाती है। हालांकि, इसकी अपनी चुनौतियां हैं, जैसे उपयुक्त स्थानों की कमी और पर्यावरणीय प्रभाव।
इसी प्रकार, केंद्रित सौर ऊर्जा तकनीक भी एक संभावनाशील विकल्प है, जिसमें सूर्य की गर्मी को संग्रहित कर बाद में बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह तकनीक दिन-रात के अंतर को संतुलित करने में सहायक हो सकती है।
सबसे अधिक संभावनाएं हरित हाइड्रोजन में दिखाई देती हैं। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की सहायता से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यह हाइड्रोजन न केवल ऊर्जा भंडारण का माध्यम बन सकता है, बल्कि इसे परिवहन और औद्योगिक उपयोग में भी लाया जा सकता है। हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन नगण्य होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल विकल्प बनता है।
स्पष्ट है कि भारत को ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में विविधता लानी होगी। केवल एक तकनीक पर निर्भर रहना न तो सुरक्षित है और न ही टिकाऊ। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार नीतिगत स्तर पर वैकल्पिक तकनीकों को प्रोत्साहन दे, अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाए और निजी क्षेत्र को भी इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित करे।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी होगा, बल्कि भारत की सामरिक सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
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