जामुड़िया, 26 मई।
विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को पश्चिम बर्धमान जिले के चुरुलिया में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर क्षेत्र में एक भव्य प्रभात फेरी का आयोजन किया गया, जो कवि के समाधि स्थल से आरंभ होकर पूरे चुरुलिया क्षेत्र का भ्रमण करते हुए पुनः समाधि स्थल पर ही संपन्न हुई।
जयंती के मुख्य समारोह के अंतर्गत एक सांस्कृतिक मेले का भी उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षाविदों और विशिष्ट अतिथियों ने कवि के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डाला। समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि काजी नजरुल इस्लाम एक ऐसे अद्वितीय कवि थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से न केवल साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि स्वाधीनता संग्राम में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने उल्लेख किया कि कवि ने न केवल शब्दों की शक्ति का परिचय दिया, बल्कि समय आने पर राष्ट्र की सेवा के लिए संघर्ष का मार्ग भी अपनाया।
कार्यक्रम के दौरान बंगाली साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें विश्व स्तरीय साहित्यकार बताया गया। जन्मजयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस मेले में दिनभर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने भाग लिया और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।















