संपादकीय
07 Mar, 2026

क्या बिहार में बनेगा भाजपा का मुख्यमंत्री: नीतीश युग के बाद की राजनीति का नया समीकरण

बिहार में भाजपा की बढ़ती ताकत और नए नेतृत्व की संभावना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, नीतीश कुमार चुनौती में।

बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। लंबे समय से राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या अब बिहार में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो रहा है। दूसरी ओर तेजस्वी यादव की राजनीतिक मजबूती को लेकर भी बहस जारी है। इन परिस्थितियों में बिहार की सत्ता का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है।
करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने कई बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंने 2005 से लेकर अब तक अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के साथ सरकार चलाई। कभी भाजपा के साथ, तो कभी राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर उन्होंने सत्ता संभाली।
लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनकी राजनीतिक ताकत पहले जैसी नहीं दिखाई देती। एक समय था जब 2005, 2010, 2015 और 2020 के चुनावों में वे सत्ता के निर्विवाद केंद्र थे, परंतु अब स्थिति बदल चुकी है। उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के पास भले ही अच्छी संख्या में विधायक हों, लेकिन सत्ता का असली संतुलन अब भाजपा के हाथों में अधिक दिखाई देता है।
बिहार विधानसभा में भाजपा आज सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 101 सीटों पर चुनाव लड़कर पार्टी ने 79 सीटें जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इसके कारण सत्ता के समीकरण में भाजपा की भूमिका निर्णायक हो गई है।
अगर भाजपा अपने सहयोगियों को जोड़ ले तो स्थिति और मजबूत हो जाती है। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और वह एनडीए के साथ खड़ी है। इसके अलावा जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी भाजपा के साथ मानी जाती हैं।
इन सभी दलों के विधायकों को जोड़ने पर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की संख्या 117 के आसपास पहुंच जाती है, जबकि बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है। यानी बहुमत से केवल पांच सीटों की कमी रह जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के लिए पांच अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। छोटे दलों या निर्दलीय विधायकों के समर्थन से यह संख्या आसानी से पूरी की जा सकती है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या नीतीश कुमार को दबाव में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि भाजपा की बढ़ती ताकत के कारण उनके लिए मुख्यमंत्री बने रहना पहले जैसा आसान नहीं रहा।
हालांकि जदयू के कुछ नेता अभी भी चाहते हैं कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहें, लेकिन भाजपा के अंदर यह भावना भी बढ़ रही है कि अब राज्य में पार्टी का अपना मुख्यमंत्री होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह लगभग चार दशक बाद होगा, जब बिहार में भाजपा का पूर्ण रूप से नेतृत्व वाला मुख्यमंत्री सत्ता संभालेगा।
बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव को भी एक बड़े खिलाड़ी के रूप में देखा जाता है, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उनकी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार मजबूत नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर राजद को 60 से 70 सीटें मिलतीं तो स्थिति पूरी तरह अलग हो सकती थी। उस स्थिति में नीतीश कुमार के पास भाजपा से अलग होकर नई सरकार बनाने की संभावना भी मजबूत हो सकती थी, लेकिन मौजूदा समीकरणों में ऐसा करना उनके लिए बेहद जोखिम भरा कदम होगा।
अगर बिहार में सत्ता परिवर्तन होता है और भाजपा मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती है तो सबसे पहले जिस नाम की चर्चा होती है, वह है सम्राट चौधरी। उन्हें भाजपा का मजबूत ओबीसी चेहरा माना जाता है और संगठन में उनकी पकड़ भी मजबूत है।
इसके अलावा विजय कुमार चौधरी का नाम भी चर्चा में आता है, हालांकि वे जदयू से जुड़े रहे हैं और समीकरण बदलने पर ही उनकी संभावना बनती है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी नए चेहरे को सामने लाकर सभी को चौंका सकते हैं। ऐसा पहले भी कई राज्यों में देखा गया है, जहां पार्टी ने अचानक नए नेता को मुख्यमंत्री बना दिया।
बिहार की राजनीति में लंबे समय तक दो ही ध्रुव रहे हैं—एक तरफ नीतीश कुमार और दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक परिवार। लेकिन अब यह व्यवस्था बदलती हुई दिखाई दे रही है।
यदि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाती है तो यह बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जाएगी। इससे राज्य की सत्ता संरचना और राजनीतिक रणनीतियां पूरी तरह बदल सकती हैं।
बिहार की राजनीति इस समय संक्रमण के दौर से गुजर रही है। नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक प्रभाव अब चुनौती के दौर में है। भाजपा की बढ़ती ताकत और विपक्ष की कमजोर स्थिति ने सत्ता के समीकरण को जटिल बना दिया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बिहार में सचमुच भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है या फिर सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए कोई नया राजनीतिक फार्मूला सामने आता है। इतना तय है कि बिहार की राजनीति आने वाले दिनों में कई बड़े मोड़ लेने वाली है और इसका असर पूरे देश की राजनीति पर भी पड़ेगा।
|
आज का राशिफल

इस सप्ताह आपके लिए अनुकूल समय है। पेशेवर मोर्चे पर सफलता मिलने के योग हैं। व्यक्तिगत जीवन में भी सुकून और संतोष रहेगा।
भाग्यशाली रंग: लाल
भाग्यशाली अंक: 9
मंत्र: "ॐ हं राम रामाय नमः"

आज का मौसम

भोपाल

16° / 26°

Rainy

ट्रेंडिंग न्यूज़

ग्वालियर चिड़ियाघर में सफेद बाघिन ने तीन शावकों को जन्म दिया

गांधी प्राणी उद्यान में जन्मे तीन शावकों में एक सफेद और दो रॉयल बंगाल टाइगर शामिल हैं सभी शावक स्वस्थ हैं और विशेष निगरानी में रखे गए हैं।

शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स और निफ्टी कमजोर

शेयर बाजार की शुरुआत में निवेशकों के बीच उतार-चढ़ाव देखने को मिला, सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी और प्रमुख शेयरों में मिली-जुली चाल बनी रही।

आर्टेमिस-II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की चांद के साथ पहली नज़दीकी मुलाकात

नासा के आर्टेमिस-II मिशन में अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल से चंद्रमा का अद्वितीय दृश्य देख रहे हैं और इसे समझने के लिए प्रशिक्षण सामग्री से तुलना कर अपना विश्लेषण कर रहे हैं।

इजरायल ने अमेरिका के रेस्क्यू ऑपरेशन को सराहा, ईरान ने उठाए सवाल

इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिका के पायलट को ईरान से बचाने वाले ऑपरेशन की सफलता पर ट्रंप को बधाई दी, जबकि ईरान ने इसके दावों पर सवाल उठाए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेशभर में उत्सव और जनसम्पर्क अभियान का शुभारंभ

भाजपा ने प्रदेशभर में अपने स्थापना दिवस पर ध्वजारोहण, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान और ‘गांव-बस्ती चलो’ अभियान के माध्यम से जनसम्पर्क कार्यक्रम आयोजित किए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना और 07 अप्रैल की ऐतिहासिक घटनाएँ

07 अप्रैल को डब्ल्यूएचओ की स्थापना हुई और इसे वर्ल्ड हेल्थ डे के रूप में मनाया जाता है। साथ ही इस दिन कई ऐतिहासिक घटनाएँ और महत्वपूर्ण जन्म व निधन भी दर्ज हैं।

अमेरिका और चीन के प्रभाव से दूर स्वतंत्र वैश्विक गठबंधन बनाने की अपील

फ्रांस के राष्ट्रपति ने देशों से किसी एक महाशक्ति पर निर्भर न रहने और लोकतंत्र तथा अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित नई वैश्विक व्यवस्था बनाने का आह्वान किया।

मालदीव में जनमत संग्रह और मेयर चुनाव में सत्ताधारी दल को झटका

संवैधानिक बदलावों को जनता ने नकारा और मेयर चुनावों में विपक्ष के बेहतर प्रदर्शन से सरकार की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती नजर आई।

रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में पांच लोगों की मौत कई घायल

रातभर चले हमलों में रिहायशी इलाकों और बाजारों को निशाना बनाया गया जिससे कई शहरों में नुकसान हुआ और सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

राष्ट्रपति मुर्मू ने ईस्टर पर दी शुभकामनाएं, बताया करुणा और एकता का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईस्टर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी और समाज में करुणा, क्षमा और भाईचारे का संदेश साझा किया।