26 मार्च 2026।
हमारे प्राचीन ग्रंथों में यज्ञ चिकित्सा का उल्लेख मिलता है और इसका मूल सिद्धांत यह है कि यह स्थूल नहीं बल्कि सूक्ष्म रूप में शरीर पर असर डालती है। हवन एक ऐसा शुद्धिकरण अनुष्ठान है जो मनुष्य से लेकर प्रकृति तक को शुद्ध करता है।
गुरुवार को सुबह एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण एवं प्राकृतिक संस्थान प्रयागराज की ओर से नवरात्र पर आयोजित कार्यक्रम में जाने-माने स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने लोगों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यज्ञ चिकित्सा सनातन धर्म के आरम्भ से ही ऋषि मुनियों द्वारा की जाने वाली प्राचीन और वैज्ञानिक प्रथा है। ऋषि मुनि हवा का सूक्ष्म परीक्षण कर यह पहचान लेते थे कि उसमें कौन सा वायरस या विकार मौजूद है और कौन सा रोग फैल सकता है। इस जानकरी के आधार पर वन-औषधियों का हवन करके हवा में मौजूद विषाणु और कीटाणुओं को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध किया जाता था।
सतीश राय ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली के कारण आज लोग शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हैं और किसी न किसी राहत की तलाश में रहते हैं। मंत्रों के उच्चारण से यज्ञ करने पर उत्पन्न ऊर्जा वहां उपस्थित व्यक्तियों के चक्रों को शुद्ध कर मजबूत बनाती है। यह सकारात्मक ऊर्जा वातावरण को भी शुद्ध करती है, जिससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोग रोग मुक्त हो जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि रामनवमी के दिन यज्ञ या हवन करने से दैहिक, दैविक और भौतिक लाभ मिलता है। छोटे रूप का हवन न केवल व्यक्ति पर बल्कि घर के वातावरण पर भी शुभ प्रभाव डालता है। नियमित हवन करना पर्यावरण की शुद्धि का भी एक प्रभावी उपाय है। हवन में डाली गई दिव्य औषधियों से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद रोगजनक कीटाणुओं को नष्ट करता है। साधारण रोगों से बचने का सबसे उत्तम साधन हवन है।












