लखनऊ, 23 मार्च।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम युवाओं को विकसित राज्य की नींव बनाने के विजन को साकार करने के लिए पिछले नौ वर्षों में लगातार ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी वजह से प्रदेश में युवा सशक्तीकरण और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। योगी सरकार की पारदर्शी और प्रभावी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के युवा अब आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को नौकरी तक सीमित न रखना, बल्कि उन्हें कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़ना है ताकि युवा शक्ति प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सके।
कौशल विकास से तैयार हो रही स्किल्ड वर्कफोर्स
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आईटीआई और कौशल विकास मिशन के माध्यम से 25 लाख 80 हजार से अधिक युवाओं को विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से अधिकांश युवाओं को रोजगार भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत एक लाख से अधिक युवाओं का उद्योगों और संस्थानों में पंजीकरण कर उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह पहल युवाओं को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान करने में मदद कर रही है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कम्प्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में छात्रों को प्रशिक्षण देकर उन्हें इंडस्ट्री 4.0 के अनुसार तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश का युवा भविष्य में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बने।
ग्लोबल स्किल हब बनने की दिशा में बढ़ता प्रदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करना है, जो उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अवसर प्रदान कर सके। निवेश, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के समन्वय से प्रदेश को ग्लोबल स्किल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
2017 से पहले रोजगार और कौशल विकास की स्थिति
वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में युवाओं के सामने अनेक चुनौतियां थीं। बेरोजगारी दर अधिक थी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित थे। फरवरी 2016 में बेरोजगारी दर लगभग 18 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार चरम पर थे। भर्तियां वर्षों तक लंबित रहती थीं और निजी क्षेत्र में उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करने की सोच का अभाव था। औद्योगिक निवेश की धीमी रफ्तार के कारण बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती गई और युवाओं को रोजगार की तलाश में प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था।
डिजिटल सशक्तीकरण से बढ़ा युवाओं का आत्मविश्वास
योगी सरकार युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दे रही है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत अब तक 49.86 लाख से अधिक टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए जा चुके हैं। इस योजना का लक्ष्य 2 करोड़ युवाओं को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराना है। डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से युवाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई सुधार किए गए हैं। विभिन्न आयोगों और भर्ती बोर्डों के माध्यम से अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। परीक्षाओं में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण कानून लागू किया गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में एकल अवसर पंजीकरण व्यवस्था लागू कर आवेदन प्रक्रिया सरल बनाई गई। समूह ख अराजपत्रित और समूह ग पदों की सीधी भर्ती में साक्षात्कार समाप्त कर पारदर्शिता को और मजबूत किया गया है।
बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी
प्रदेश में रोजगार के बढ़ते अवसरों का असर बेरोजगारी दर में भी दिखाई दिया। फरवरी 2016 में जहां बेरोजगारी दर लगभग 18 प्रतिशत थी, वहीं वर्तमान में यह घटकर 2.21 प्रतिशत रह गई है। यह कमी दर्शाती है कि प्रदेश में रोजगार सृजन और कौशल विकास की नीतियां प्रभावी साबित हो रही हैं।












