नई दिल्ली, 27 अप्रैल।
तमिलनाडु में 8 से 12 हजार वर्ष पुराना जीवाश्म स्थल मिलने की पुष्टि की गई है, जिसे दक्षिण भारत के तटीय भूगोल और प्राचीन समुद्री परिस्थितियों को समझने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह खोज इस ओर संकेत करती है कि यह क्षेत्र कभी समुद्री तटीय सीमा का हिस्सा रहा होगा।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बताया कि थूथुकुड़ी जिले में वर्ष 2023 की भारी वर्षा के बाद सामने आए जीवाश्म स्थलों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। प्रशासन के अनुरोध पर भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ने यह क्षेत्रीय अध्ययन किया था।
जांच के दौरान एक नए “फॉसिल बेड” की पुष्टि हुई है, जिसे होलोसीन काल का माना गया है, जिसकी उम्र लगभग 8 हजार से 12 हजार वर्ष के बीच आंकी गई है।
इस खोज को भारत के क्वाटरनरी काल के जीवाश्म अभिलेखों को और अधिक समृद्ध करने वाला बताया गया है, जिससे प्राचीन वन्यजीवन, पर्यावरणीय परिस्थितियों और जलवायु के अध्ययन में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।
भूपेन्द्र यादव ने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि यह जीवाश्म थूथुकुड़ी के निकट पनाइयूर, पट्टिनमरुदुर और कायलपट्टिनम क्षेत्रों में पाए गए हैं।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ने इस दौरान कुल 104 जीवाश्म नमूने एकत्र किए हैं, जिनमें मोलस्कन जीवाश्म, गैस्ट्रोपोड, बाइवाल्व नमूने और जीवाश्म युक्त चट्टानों के टुकड़े शामिल हैं।
यह खोज दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों के भूवैज्ञानिक इतिहास और प्राचीन समुद्री पर्यावरण को समझने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है और यह भी संकेत देती है कि यह क्षेत्र कभी समुद्र की तटीय सीमा का हिस्सा रहा होगा।













