अनूपपुर, 20 अप्रैल।
पवित्र नगरी अमरकंटक में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर सोमवार को भक्ति और अटूट श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर तड़के से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होने लगे थे। भक्तों ने जीवनदायिनी मां नर्मदा की शीतल जलधारा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। इस दौरान पूरे तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक उल्लास छाया रहा और श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन-अर्चन कर सुख, शांति एवं जन-कल्याण की मंगल कामना की।
नर्मदा उद्गम के कोटि तीर्थ कुंड, रामघाट के दोनों तटों, आरंडी संगम और नर्मदा पुष्कर बांध पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भीषण गर्मी और तपती धूप भी श्रद्धालुओं के विश्वास को डिगा नहीं सकी। लोग नंगे पांव मंदिर परिसर में लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। पूरा वातावरण 'नर्मदा माई की जय' के उद्घोष से गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
इस विशेष अवसर पर पेंड्रा रोड और अनूपपुर क्षेत्र से बड़ी संख्या में आईं महिलाओं ने पारंपरिक रूप से घट-दान की रस्म निभाई। सनातन परंपराओं का पालन करते हुए महिलाओं ने मिट्टी के कलशों में गुड़, तिल, फल, सब्जियां और मिष्ठान रखकर ब्राह्मणों व पुरोहितों को दान स्वरूप अर्पित किए। मान्यता है कि वैशाख मास की इस तिथि पर किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से अक्षय तृतीया को साधना और सेवा का महापर्व माना जाता है। इस दिन प्याऊ लगवाना और अन्न-वस्त्र का दान करना विशेष फलदायी होता है। अमरकंटक की पवित्र धरा पर इस बार भी सेवा और श्रद्धा का यही अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जहां श्रद्धालुओं ने पूर्ण निष्ठा के साथ अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।










