वाराणसी, 03 अप्रैल 2026।
विक्रमोत्सव-2026 के तहत आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य मंचन किया गया। यह महानाट्य उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के न्यायप्रिय और सुशासनकारी व्यक्तित्व को जन-जन तक पहुँचाने का विशेष प्रयास है।
जनसंपर्क अधिकारी अनुराग उइके ने बताया कि तीन दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित इस महानाट्य की संकल्पना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की है।
महानाट्य में पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित कथा और राजेश कुशवाहा के निर्माण कार्य के साथ संजीव मालवी के निर्देशन में 200 से अधिक कलाकार शामिल हैं। कार्यक्रम में हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध दृश्य, लाइट शो, आतिशबाजी और बाबा महाकाल की भस्म आरती की झलकियां शामिल हैं। महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य गाथा को प्रस्तुत किया गया है।
तीन भव्य मंचों पर सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व, न्यायप्रियता और सुशासन को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया। उनके दरबार के नवरत्न, जैसे कालिदास और वराहमिहिर की विद्वता भी मंच पर सजीव दिखाई दी। महाकाल मंदिर की भव्य संरचना और आठ फीट के शिवलिंग पर दिव्य भस्म आरती का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
महानाट्य को और अधिक जीवंत बनाने के लिए 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी के साथ भव्य प्रस्तुतिकरण किया गया। मंचीय प्रभाव को सशक्त बनाने हेतु 400 से अधिक लाइट्स, 80×32 फीट की एलईडी स्क्रीन और दो बार आतिशबाजी का आयोजन किया गया। मैदान में 10 से 15 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित करेंगे। यह घड़ी उज्जैन में स्थापित विश्व की पहली वैदिक घड़ी का हिस्सा है, जो वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टैण्डर्ड टाइम, पंचांग, विक्रम संवत, ग्रह स्थिति और चंद्र स्थिति की जानकारी प्रदान करती है।












