कोलकाता, 01 अप्रैल।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में आसनसोल दक्षिण सीट पर कोयला अर्थव्यवस्था, अवैध खनन और पहचान की राजनीति चुनावी बहस के मुख्य मुद्दे बनकर उभरे हैं। यह शहरी-औद्योगिक सीट रानीगंज कोयला क्षेत्र का हिस्सा है, जहां उद्योगों की धीमी गति, अनौपचारिक कोयला नेटवर्क और जनसांख्यिकीय बदलाव राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी, जिसने 2021 में यह सीट तृणमूल कांग्रेस से जीती थी, इसे इस बार भी बरकरार रखने के प्रयास में है। पार्टी ने मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पॉल को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व विधायक तापस बनर्जी को मैदान में उतारा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिल्पी चक्रवर्ती और कांग्रेस ने सौविक मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है।
2021 में अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस की सायोनी घोष को 4,487 मतों से हराया था, जो इस औद्योगिक क्षेत्र में भाजपा की महत्वपूर्ण जीत मानी गई थी। हालांकि, 2022 के लोकसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा की बड़ी जीत ने पार्टी की स्थिति पर असर डाला।
रानीगंज कोयला क्षेत्र में रोजगार और अवैध खनन प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। कभी हजारों लोगों को स्थायी रोजगार देने वाला क्षेत्र अब स्वचालन और पुनर्गठन की वजह से कम रोजगार दे पा रहा है। कई लोग अनौपचारिक काम या पलायन को मजबूर हैं। वहीं, अवैध कोयला खनन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आजीविका का साधन बना हुआ है, जिससे यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
खनन के कारण कई इलाकों में जमीन धंसने की समस्या गंभीर है। प्रभावित लोग मकानों में दरार, जमीन बैठने और हादसों के खतरे से जूझ रहे हैं। पुनर्वास, मुआवजा और सुरक्षा उपाय यहां के चुनावी बहस के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
आसनसोल दक्षिण की सामाजिक संरचना विविध है। बिहार और झारखंड मूल के हिंदीभाषी मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग 35–40 प्रतिशत हैं। भाजपा भाषाई विभाजन से ऊपर उठकर हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस बंगाली मतदाताओं और अल्पसंख्यकों के पारंपरिक समर्थन को मजबूत कर रही है। राम नवमी जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए राजनीतिक सक्रियता चुनावी माहौल पर असर डाल रही है।
भारतीय जनता पार्टी ने कोयला तस्करी, भर्ती अनियमितता और स्थानीय सिंडिकेट के मुद्दे उठाए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का आरोप लगाया और राज्य सरकार की सामाजिक योजनाओं व विकास कार्यों को अपने अभियान की ताकत बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि विविध सामाजिक संरचना और किसी एक प्रभावशाली मतदाता समूह की कमी यहां मुकाबले को कड़ा बनाएगी। छोटे मत प्रतिशत बदलाव भी परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। वाम दल मुख्य दावेदार नहीं हैं, लेकिन उनके मत परिणाम पर असर डाल सकते हैं।
आसनसोल नगर निगम के कई वार्डों के साथ अमरसोटा, एगरा, बल्लवपुर, जेमारी और तिराट ग्राम पंचायत इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं। मतदान पहले चरण में 23 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी।












