उमरिया, 16 मई।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शनिवार सुबह जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई एक महिला पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल फैल गया। वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष ने एक बार फिर गंभीर स्थिति पैदा कर दी है।
मृतका की पहचान 32 वर्षीय ममता यादव के रूप में हुई है, जो पनपथा रेंज के कुदरी गांव की निवासी थी। जानकारी के अनुसार वह अपने पति पप्पू यादव और अन्य ग्रामीणों के साथ सुबह जंगल में तेंदूपत्ता एकत्र करने गई थी, तभी पनपथा कोर क्षेत्र के कक्ष क्रमांक आरएफ-447 में झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमला इतना अचानक और तेज था कि महिला को संभलने का अवसर भी नहीं मिला। बाघ ने उसके गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किया। साथ मौजूद ग्रामीण और पति शोर मचाते हुए उसकी ओर दौड़े, जिसके बाद बाघ जंगल की ओर भाग गया, लेकिन तब तक ममता यादव की जान जा चुकी थी। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई। ग्रामीणों को जंगल में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
पिछले 15 दिनों में यह दूसरी मौत है, जिससे क्षेत्र में वन्यजीव संघर्ष और अधिक गंभीर हो गया है, जबकि तीन अन्य ग्रामीण भी घायल हो चुके हैं। तेंदूपत्ता सीजन के चलते जंगल में ग्रामीणों की आवाजाही बढ़ने से यह स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
हाल के मामलों में 3 मई को कुदरी निवासी रज्जू कोल की महुआ और लकड़ी बीनते समय बाघ हमले में मौत हो गई थी। 10 मई को धमोखर बफर क्षेत्र में मीरा सिंह पर भालू ने हमला किया था, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई। 11 मई को मानपुर बफर क्षेत्र में निरसिया बैगा पर बाघ ने हमला कर हाथ को घायल कर दिया था, जबकि 12 मई को धर्मेंद्र नामक ग्रामीण भी बाघ हमले में सिर और शरीर पर गंभीर चोटों का शिकार हुआ था।
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय के साथ नाराजगी भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रह उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन जंगल में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने वन विभाग से वन्यजीवों को आबादी से दूर रखने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
वन विभाग के अनुसार घटना के बाद वन अमला और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा और तत्काल सहायता के रूप में पांच हजार रुपये प्रदान किए गए हैं, जबकि शेष मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिया जाएगा। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने वन क्षेत्र से सटे गांवों में मानव और वन्यजीव संतुलन को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।










