ढाका, 04 नवंबर।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में कपड़ा मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन मंगलवार को हिंसक रूप ले गया। तीन दिन से चल रहे प्रदर्शन के दौरान मजदूरों और पुलिस के बीच दिनभर टकराव हुआ। शाम को पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। झड़पों में करीब 100 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। अशांति फैलाने के आरोप में 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मजदूरों ने आंदोलन के पीछे राजनीतिक साजिश या बाहरी उकसावे की बात को खारिज किया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण वे वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन में बाहरी लोग शामिल होकर माहौल बिगाड़ रहे हैं। देर रात तक 40 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।
प्रदर्शनकारी शोएब इस्लाम ने कहा कि मजदूर हिंसा या तोड़फोड़ में शामिल नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उचित कारण के प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। साथ ही चेतावनी दी कि साथियों की मनमानी गिरफ्तारी का विरोध किया जाएगा। मजदूर शेफली बेगम ने भी बाहरी समूहों के उकसावे के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वे अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरे हैं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी शमीम ने कहा कि सरकार यदि 30 हजार टका न्यूनतम वेतन की घोषणा कर दे, तो आंदोलन तत्काल समाप्त हो सकता है। उनके अनुसार, घोषणा होते ही मजदूर अपने कारखानों में लौट जाएंगे। वहीं, सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शन में ऐसे लोग शामिल हो गए हैं, जिनका मजदूरों की वेतन संबंधी मांगों से कोई संबंध नहीं है।
ढाका रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक मो. मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि ढाका, मीरपुर, गाजीपुर और नारायणगंज में हुई घटनाओं के सिलसिले में 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार लोगों में कोई भी कपड़ा कारखाने का कर्मचारी नहीं है। पुलिस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए साक्ष्य जुटा रही है।
ढाका जिला पुलिस अधीक्षक शमीमा परवीन ने आरोप लगाया कि बुर्का और हेलमेट पहने कुछ लोग मजदूरों को भड़काकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इन गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
मीरपुर डिवीजन के उपायुक्त हसन मोहम्मद नाशेर रिकबदार ने वेतन बोर्ड के गठन के बावजूद जारी प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरों के वेतन में वृद्धि के लिए पहले ही बोर्ड बना चुकी है और वेतन निश्चित रूप से बढ़ेगा। साथ ही चेतावनी दी कि आंदोलन जारी रहने पर पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।















