नई दिल्ली, 05 मई।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा गैर-खाद्य ऋण में 15.9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में निरंतर आर्थिक गतिविधियों और ऋण की मजबूत मांग को दर्शाती है।
जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक कुल बकाया ऋण 212.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.2 लाख करोड़ रुपये अधिक है।
यह वृद्धि ऐसे समय में देखने को मिली है जब कम ब्याज दरों का वातावरण और सरकार के पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिला है तथा उधारकर्ताओं का भरोसा मजबूत हुआ है।
क्षेत्रवार आंकड़ों में सेवा क्षेत्र ने सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद व्यक्तिगत ऋण, कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र तथा औद्योगिक क्षेत्र का स्थान रहा।
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वृद्धि बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष 10.4 प्रतिशत थी। यह वृद्धि ग्रामीण मांग और औपचारिक ऋण तक बेहतर पहुंच के कारण हुई है।
औद्योगिक क्षेत्र में ऋण वृद्धि लगभग दोगुनी होकर 15 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 8.2 प्रतिशत थी। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिए गए ऋण का बड़ा योगदान रहा।
सूक्ष्म और लघु उद्योगों में 33.1 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मध्यम उद्योगों में भी उल्लेखनीय विस्तार देखा गया, जिससे औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है।
सेवा क्षेत्र में 19 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष 12 प्रतिशत थी। इसमें गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, व्यापार और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र की मांग प्रमुख रही।
व्यक्तिगत ऋण में भी 16.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वाहन ऋण और सोने के आभूषणों पर ऋण की मजबूत मांग शामिल रही, साथ ही आवास ऋण में स्थिर वृद्धि देखी गई।
आंकड़े बताते हैं कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, जहां बढ़ता ऋण निवेश, उपभोग और रोजगार सृजन को सहारा दे रहा है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने स्थिरता दिखाई है, जिसे मजबूत बैंकिंग प्रणाली, कम दबाव वाले परिसंपत्ति स्तर और लाभप्रदता ने समर्थन दिया है।






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