30 मार्च 2026, नई दिल्लीभारत वर्ष 2027 में अपनी पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना आयोजित करने जा रहा है, जिसकी प्रारंभिक प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा आंकड़ा संग्रह अभियान माना जा रहा है।
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिसमें गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए आंकड़े एकत्र करेंगे। साथ ही पहली बार नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी, जो 16 भाषाओं में उपलब्ध होगी।
स्व-गणना की प्रक्रिया में नागरिक मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉग इन कर अपनी जानकारी भर सकेंगे। जानकारी जमा करने के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना पहचान संख्या प्राप्त होगी, जिसे गणनाकर्मी के सत्यापन के समय प्रस्तुत करना होगा। अधिकारियों के अनुसार, आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था की गई है।
यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के तहत संचालित की जाएगी। इस जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है, जबकि बर्फीले क्षेत्रों में 1 अक्टूबर 2026 को आधार तिथि माना जाएगा।
जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच आवास और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या से संबंधित सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस दौरान जातिगत आंकड़ों का संकलन भी किया जाएगा।
पहले चरण के तहत अलग अलग राज्यों में चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में मई महीने में घर सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके पहले 15 दिनों का स्व-गणना समय दिया जाएगा।
इस विशाल अभियान के लिए सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसमें देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, हजारों उप जिलों, शहरों और लाखों गांवों को शामिल किया जाएगा।
गृह मंत्रालय ने बताया कि इस बार एक विशेष डिजिटल प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और रियल टाइम निगरानी व्यवस्था शामिल है। साथ ही लगभग 31 लाख गणनाकर्मियों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि आंकड़ों का संग्रहण समयबद्ध और सटीक तरीके से किया जा सके।
इससे पहले नवंबर 2025 में देशभर में प्रायोगिक परीक्षण भी किया गया था, जिसमें डिजिटल प्रणाली और प्रशिक्षण व्यवस्था की जांच की गई। नई तकनीक और नागरिकों की भागीदारी के साथ यह जनगणना अधिक सटीक और उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।












