नई दिल्ली, 04 नवंबर।
भारतीय सेना की मारक क्षमता को और अधिक धार देते हुए नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड कंपनी ने स्वदेशी 'नागास्त्र-1' एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन की 450 यूनिट्स की दूसरी खेप सेना को सौंप दी है। आपातकालीन खरीद शक्तियों के अंतर्गत खरीदे गए इन अत्याधुनिक आत्मघाती ड्रोनों में जीपीएस तकनीक, दिन-रात निगरानी के लिए 360-डिग्री जिम्बल और थर्मल कैमरे की सुविधा मौजूद है, जो 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन के छक्के छुड़ाने में पूरी तरह सक्षम हैं। बबीना और लद्दाख जैसी जगहों पर कड़े परीक्षण से गुजर चुके इन ड्रोनों की खासियत यह है कि ये दुश्मन के रडार से बचकर 60 मिनट तक हवा में मंडरा सकते हैं और 1.5 किलोग्राम विस्फोटक वारहेड के साथ मात्र दो मीटर की सटीक दूरी से लक्ष्य को नेस्तनाबूद कर सकते हैं।
लगभग 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित इस घातक हथियार का उपयोग पूर्व में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को तहस-नहस करने के लिए भी किया जा चुका है। हवा में घात लगाकर हमला करने की खूबी वाले इस मानवरहित सिस्टम को जरूरत पड़ने पर वापस भी बुलाया जा सकता है, जिससे इसका दोबारा उपयोग मुमकिन हो पाता है। पंद्रह किलोमीटर के दायरे में आतंकी लॉन्च पैड, घुसपैठियों और दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक प्रहार करने वाले इस किफायती और रीयूजबल लॉन्चर सिस्टम के जुड़ने से देश की सीमाई सुरक्षा व्यवस्था और पैदल सेना का ढांचा अभेद्य बन गया है।















