भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रमण सूरी ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े इंदौर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक अन्याय की समाप्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सत्य को अधिक समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता और भारत की सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक पहचान सदैव अक्षुण्ण रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि भोजशाला केवल किसी विवादित संरचना का नाम नहीं है, बल्कि इसे राजा भोज के वंशजों द्वारा मां सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन शिक्षण एवं आस्था स्थल के रूप में स्थापित किया गया था। उनके अनुसार हिंदू समाज ने वर्षों तक अपने धार्मिक स्थलों और विरासत के साथ हुए अन्याय को सहा है, लेकिन उसने सदैव शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से न्याय की मांग की।
रमण सूरी ने अयोध्या निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब ऐतिहासिक तथ्यों की पुनर्स्थापना के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरातात्विक प्रमाण, शिलालेख और ऐतिहासिक दस्तावेज भोजशाला के हिंदू स्वरूप को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं।
भाजपा नेता ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कानून कई ऐतिहासिक विवादों के समाधान में बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि देश सभी धर्मों का सम्मान करता है, लेकिन ऐतिहासिक सच्चाइयों की अनदेखी कर सामाजिक समरसता स्थापित नहीं की जा सकती।
अंत में रमण सूरी ने शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा देश की सांस्कृतिक विरासत और आस्था स्थलों की रक्षा के लिए पूर्णतः संवैधानिक मार्ग पर प्रतिबद्ध है।








