भोपाल, 27 अप्रैल,
भोपाल मेट्रो के प्राथमिक कॉरिडोर पर सोमवार से स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली पूरी तरह लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के बाद यात्रियों को टिकट काउंटर पर लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और अब मोबाइल ऐप तथा क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल टिकट लेकर सीधे प्रवेश किया जा सकता है।
पहले दिन विभिन्न स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों ने यात्रियों को डिजिटल टिकट लेने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। एम्स से सुभाष नगर और एमपी नगर के बीच यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने क्यूआर कोड स्कैन कर बिना नकद भुगतान के सफर किया। वहीं अनेक यात्रियों ने मौके पर ही मोबाइल ऐप डाउनलोड कर डिजिटल टिकट की सुविधा का उपयोग किया।
इसके बावजूद सुविधा बढ़ने के बाद भी मेट्रो में यात्रियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी गई है और कोच अधिकांश समय खाली ही नजर आ रहे हैं। यात्रियों को आकर्षित करने के लिए किराए में पांच से पंद्रह प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई दे रहा है। सप्ताहांत में जहां दो से तीन सौ यात्री सफर कर रहे हैं, वहीं कार्यदिवसों में यह संख्या सौ से भी कम रह जाती है।
जानकारों के अनुसार यात्रियों की कमी का प्रमुख कारण ट्रेनों की कम आवृत्ति है। वर्तमान में ऑरेंज लाइन पर केवल नौ फेरे संचालित हो रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या सत्रह थी। इससे सेवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि मई तक सीबीटीसी संकेत प्रणाली लागू होने के बाद ट्रेनों की गति और आवृत्ति दोनों में सुधार होगा। इसके बाद एम्स से सुभाष नगर का सफर लगभग पच्चीस मिनट से घटकर सोलह मिनट रह जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।













