वाराणसी, 27 मार्च 2026।
वाराणसी में वासंतिक चैत्र नवरात्र के नौंवे और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री और महालक्ष्मी गौरी के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी, जिन्होंने विधिवत पूजन-अर्चना कर देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास किया।
शुक्रवार को गोलघर स्थित मां सिद्धिदात्री मंदिर और लक्ष्मीकुंड स्थित महालक्ष्मी गौरी मंदिर में भोर से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मां सिद्धिदात्री के मंदिर में पुजारी की देखरेख में देवी का पंचामृत स्नान कर श्रृंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भोग और मंगला आरती सम्पन्न हुई।

दरबार खुलते ही श्रद्धालुओं ने जय माता दी का उद्घोष करते हुए मत्था टेका और नारियल, गुड़हल की माला, लाल चुनरी एवं प्रसाद अर्पित कर अपनी मुरादें मांगी। मान्यता है कि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री के पूजन से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। शिव महापुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर कहलाए।
मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और उनके चार हाथों में शंख, गदा, कमल का फूल और चक्र धारण हैं। उन्हें माता सरस्वती का स्वरूप भी माना जाता है। नवरात्र के अंतिम दिन महालक्ष्मी गौरी के पूजन का भी विशेष महात्म्य है। मंदिर के दरबार में भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और उन्होंने वैभव, समृद्धि और खान-पान के सुख की कामना की।
काशी में चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन दुर्गाकुंड स्थित कुष्मांडा दरबार सहित अन्य देवी मंदिरों में भी भक्तों ने दर्शन-पूजन कर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का प्रयास किया।











