सरकार व नीतियाँ
13 May, 2026

अदालतों के ढांचे के लिए केंद्र ने जारी किए 401 करोड़, न्याय व्यवस्था को मिलेगा बल

केंद्र सरकार ने जिला और अधीनस्थ अदालतों की आधारभूत संरचना मजबूत करने के लिए 401.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करते हुए न्यायिक सुविधाओं के विस्तार और सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

नई दिल्ली, 13 मई।

देशभर की जिला और अधीनस्थ अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 401.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को यह राशि केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत वर्चुअल माध्यम से जारी की।

नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित बैठक के दौरान यह धनराशि सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हस्तांतरित की गई। इस पहल का उद्देश्य जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक सुविधाओं का विस्तार करना और राज्यों को बेहतर आधारभूत संरचना विकसित करने में सहयोग देना है। बैठक में उच्च न्यायालयों तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ‘न्याय की सहज उपलब्धता’ सुनिश्चित करने और न्याय प्रणाली को अधिक जनकेंद्रित बनाने के लिए मजबूत न्यायिक आधारभूत संरचना बेहद जरूरी है। उन्होंने जानकारी दी कि योजना की मौजूदा अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और इसे वर्ष 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। वित्त मंत्रालय ने फिलहाल 30 सितंबर 2026 तक योजना को अस्थायी विस्तार दे दिया है।

उन्होंने बताया कि अदालतों में आने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए योजना में “वादकारियों के लिए प्रतीक्षालय” का नया प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। साथ ही 12 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता में “न्यायिक आधारभूत संरचना सलाहकार समिति” का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य देशभर में एकीकृत न्यायिक ढांचा तैयार करना है।

बैठक में न्याय विभाग के सचिव ने वर्ष 1993-94 से जिला और अधीनस्थ अदालतों के ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 12,844.72 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 9,400.41 करोड़ रुपये पिछले 12 वर्षों में जारी हुए हैं।

योजना के तहत 31 मार्च 2026 तक 6,345 अदालत कक्ष और 4,023 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 3,161 अदालत कक्ष और 3,245 आवासीय इकाइयों का निर्माण कार्य वर्तमान में जारी है।

इस दौरान अर्जुन राम मेघवाल ने न्यायिक सुधारों से जुड़े शोध कार्यों के लिए तैयार तीन एक्शन रिसर्च रिपोर्ट भी जारी कीं। इस योजना के तहत न्याय व्यवस्था और कानूनी सुधारों से संबंधित शोध के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

इसके अतिरिक्त मंत्री ने पूर्वोत्तर के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक कानूनों पर आधारित तीन ई-पुस्तकों का भी विमोचन किया। गौहाटी उच्च न्यायालय के विधि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से तैयार इन प्रकाशनों में असम और मेघालय के विभिन्न जनजातीय समुदायों की पारंपरिक कानूनी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है, ताकि स्थानीय कानूनी परंपराओं को संरक्षित किया जा सके और विधिक जागरूकता को बढ़ावा मिले।

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