नई दिल्ली, 17 अप्रैल।
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को उच्च रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन का कोई भी मामला सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी और उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करनी होगी, साथ ही मौके पर टीम भेजकर कठोर कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि अवैध खनन से प्रभावित क्षेत्रों में ऊंचे खंभों पर हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी लाइव फीड संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा वन अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में रहे। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि आदेशों का पालन न करने पर इसे अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्यों से अनुपालन संबंधी हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि खनन कार्यों में उपयोग होने वाली मशीनों जैसे ट्रैक्टर, अर्थ मूवर्स और लोडर्स आदि में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि उनकी वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सके। अदालत ने कहा कि चंबल क्षेत्र से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन में ट्रैकिंग सिस्टम होना चाहिए, जिससे अवैध रेत परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
इससे पूर्व सुनवाई में अदालत ने मध्यप्रदेश के मुरैना में एक वन रक्षक पर रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली चढ़ाने की घटना पर गंभीर आपत्ति जताई थी। उस समय अदालत ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब राज्य मशीनरी अपने अधिकारियों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में विफल हो रही है तो उसकी उपयोगिता पर प्रश्न उठता है, क्योंकि अवैध खनन अधिकारियों की मौजूदगी में भी जारी है।
गौरतलब है कि 2 अप्रैल की सुनवाई में अदालत ने चंबल नदी में अवैध खनन से वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर तीखी टिप्पणी करते हुए खनन माफिया को चंबल के नए डकैत बताया था। साथ ही कहा गया था कि राजस्थान में माफिया पुलिस, वन और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमले तक कर रहे हैं। अदालत ने चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित क्षेत्र से बाहर करने संबंधी राजस्थान सरकार के नोटिफिकेशन पर भी रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जिन स्थानों पर घड़ियाल छोड़े गए थे, वहां भी अवैध रेत खनन जारी है और राज्य सरकार इसे रोकने में विफल रही है। अदालत ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि यदि अवैध खनन नहीं रुका तो वन, खनन, जल संसाधन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेह होंगे। इसके साथ ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी जवाब दाखिल करने को कहा गया था।



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