दंतेवाड़ा, 21 अप्रैल
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित रहे दंतेवाड़ा जिले के लिए 22 अप्रैल का दिन विशेष महत्व लेकर आ रहा है। इस दिन क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर जिले के दौरे पर पहुंचेंगे, जहां वे छिंदनार, जावंगा और पनेड़ा गांवों में तैयार मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड का लोकार्पण करेंगे।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुसार यह कार्यक्रम केवल उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘मैदान कप’ पहल के तहत दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को खेलों से जोड़ने का एक व्यापक प्रयास है। प्रशासन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन मिलकर 50 खेल मैदान विकसित कर रहे हैं, जिनमें से 15 मैदान तैयार हो चुके हैं।
जिला प्रशासन ने बताया कि तेंदुलकर बुधवार सुबह 09:30 से 10:30 बजे के बीच चार्टर्ड विमान से रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ हेलीकॉप्टर से दंतेवाड़ा रवाना होंगे। दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अधिकारियों ने पूर्व में स्थलों का निरीक्षण भी किया है।
यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि जिन क्षेत्रों में पहले भय का वातावरण था, वहां अब खेल गतिविधियों के माध्यम से नई उम्मीद दिखाई दे रही है। तेंदुलकर अपने परिवार और मुख्यमंत्री के साथ छिंदनार गांव पहुंचकर खेल परियोजना की शुरुआत करेंगे, जहां इन दिनों उत्साह का माहौल है।
छिंदनार में विकसित आधुनिक मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड में एक ही परिसर में 16 प्रकार की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें खो-खो, कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट और व्यायाम क्षेत्र शामिल हैं। यह मैदान स्थानीय बच्चों और युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। यहां तेंदुलकर बच्चों से संवाद भी करेंगे और परिसर का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे पनेड़ा मैदान और जावंगा एजुकेशन सिटी में भी कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
प्रशासन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना है। इसी क्रम में दिव्यांग खिलाड़ी मड्डाराम कवासी की मुलाकात भी तेंदुलकर से कराने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि तेंदुलकर की संस्था जिले में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय है। अब तक 15 खेल मैदान तैयार किए जा चुके हैं और 25 स्कूलों, आश्रमों व पोटाकेबिन में खेल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कई स्थानों पर मल्टी-यूज ग्राउंड विकसित किए गए हैं, जहां एक साथ कई खेलों का अभ्यास संभव है।
इसके अलावा संस्था द्वारा केवल आधारभूत ढांचा ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। जिले के 15 से अधिक शिक्षकों को मुंबई में पेशेवर प्रशिक्षण दिया गया है और बच्चों को विभिन्न खेलों की तकनीकी जानकारी भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें।










