रायपुर, 21 अप्रैल
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण कानून और परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत करना बताया गया है।
विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। बताया गया है कि यह विशेष सत्र ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर केंद्रित रहेगा, जिसमें विपक्ष के रुख पर चर्चा के साथ केंद्र सरकार के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी दलों के रवैये के कारण महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने की दिशा में बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे देशभर की करोड़ों महिलाओं की अपेक्षाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने इसे “दुखद स्थिति” बताते हुए कहा कि वे इस विषय पर दुखी मन से अपनी बात रख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि राज्य में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को लगभग 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, वहीं विधानसभा में भी 20 प्रतिशत से अधिक महिला विधायक हैं, जो सरकार की महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
साय ने विपक्ष पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रकार की राजनीति से देश को नुकसान होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में महिला आरक्षण को लेकर सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।










