शिमला, 30 मार्च।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन स्थगन प्रस्ताव को लेकर अब मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ डॉक्टर भी मुखर विरोध में सामने आ गए हैं। आईजीएमसी शिमला के कंसल्टेंट डॉक्टरों की संस्था सीनियर एकेडमिक मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन (सैमडकॉट) ने इस मामले पर जनरल हाउस की बैठक बुलाकर राज्य सरकार से वेतन स्थगन के प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों से जुड़े लंबित मामलों का समाधान नहीं हुआ तो इसका नकारात्मक असर मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
सैमडकॉट की बैठक में डॉक्टरों ने कहा कि ग्रुप-ए और ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कटौती या स्थगन का प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन उनका मौलिक अधिकार है और इसे स्थगित करने से उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
डॉक्टरों ने यह भी उठाया कि पिछले कई वर्षों से संशोधित वेतनमान के एरियर और लगभग 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान लंबित है, ऐसे में वेतन स्थगन का प्रस्ताव और कठिनाई पैदा करेगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पदोन्नति से जुड़े मुद्दों पर भी आपत्ति जताई। सैमडकॉट का कहना है कि अगस्त 2022 के बाद से राज्य के किसी भी मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर नियमित पदोन्नति नहीं हुई है, जिससे वरिष्ठ शिक्षकों में निराशा और मनोबल गिरावट देखी जा रही है।
एसोसिएशन ने कहा कि प्रिंसिपल और चिकित्सा शिक्षा निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार देकर नियुक्त किया जा रहा है, जबकि योग्य और वरिष्ठ संकाय सदस्य पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं। उनका कहना है कि इस तरह की व्यवस्था प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
सैमडकॉट ने 13 दिसंबर 2023 की राजपत्रित अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि पुनर्नियुक्त अधिकारियों को डीडीओ की शक्तियां नहीं दी जानी चाहिए, बावजूद इसके उन्हें जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिस पर डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते पदोन्नति और वेतन से जुड़े मामलों का समाधान नहीं हुआ तो मेडिकल कॉलेजों में कार्य का माहौल प्रभावित होगा और भविष्य में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की मान्यता पर भी असर पड़ सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
सैमडकॉट ने राज्य सरकार से मांग की है कि वेतन स्थगन प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए और अधिसूचित वरिष्ठता सूची के अनुसार नियमित और पारदर्शी तरीके से पदोन्नतियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि मेडिकल शिक्षा संस्थानों का संचालन सुचारु रूप से जारी रहे।












