होर्मुज, 05 मई।
अमेरिका और ईरान के बीच फारस की खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर हमलों का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा पहले से चल रहा अस्थायी युद्धविराम भी कमजोर होता दिख रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक नई पहल की घोषणा के बाद मिसाइलों और ड्रोन हमलों का दौर शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य फंसे हुए टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकलने में सहायता करना बताया गया है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का प्रमुख मार्ग है।
बताया गया है कि फरवरी में शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका-इजरायल गठजोड़ और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसमें अब तक क्षेत्र में हजारों लोगों की जान जा चुकी है।
हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी हमलों के दौरान कार्गो जहाजों पर हमला होने से पांच नागरिकों की मृत्यु की बात सामने आई है, वहीं अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के छह छोटे सैन्य नौकाओं को नष्ट कर दिया है।
इसके जवाब में ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों में संयुक्त अरब अमीरात के एक तेल बंदरगाह में आग लगने की जानकारी मिली है, जहां एक बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा भी स्थित है।
अमेरिकी नौसेना द्वारा कई हफ्तों से समुद्री नाकाबंदी लागू किए जाने को ईरान ने युद्ध जैसी कार्रवाई बताया है और इसकी कड़ी निंदा की है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि हाल की घटनाएं यह साबित करती हैं कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और शांति वार्ता जारी है, हालांकि उन्होंने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को स्थिति में और अधिक हस्तक्षेप से बचने की चेतावनी दी है।
इसके बावजूद अमेरिकी पक्ष ने दावा किया है कि उसके दो व्यापारिक जहाजों ने विध्वंसक युद्धपोतों की सुरक्षा में इस जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार किया, हालांकि ईरान ने इस दावे का खंडन किया है।
पिछले महीने आठ तारीख से अस्थायी युद्धविराम लागू होने की बात कही गई थी, जिसके बाद इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता भी हुई, लेकिन यह बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।





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