काठमांडू, 5 मई।
नेपाल सरकार द्वारा सिविल सेवा कर्मचारी ट्रेड यूनियन को समाप्त करने के निर्णय के खिलाफ देश के छह प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे अस्वीकार कर दिया है और इसके खिलाफ अदालत जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
जारी संयुक्त प्रेस बयान में नेपाल निजामति कर्मचारी संगठन, नेपाल निजामति कर्मचारी यूनियन, नेपाल राष्ट्रीय निजामति कर्मचारी संगठन, एकीकृत सरकारी कर्मचारी संगठन, नेपाल मधेसी निजामति कर्मचारी मंच और स्वतन्त्र राष्ट्र सेवक कर्मचारी संगठन के अध्यक्षों ने सरकार के इस फैसले को मनमाना बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज की है।
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि संविधान और श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को संगठित होने का अधिकार प्राप्त है, जिसे किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे मानवाधिकारों से भी जुड़ा हुआ मुद्दा बताया और अंतरराष्ट्रीय श्रम समझौतों का हवाला दिया।
संगठनों ने यह भी मांग की कि कर्मचारियों के पेशागत विकास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए संघीय सिविल सेवा कानून को तुरंत प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ट्रेड यूनियन अधिकारों को बहाल नहीं किया गया तो वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ व्यापक आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में सरकार द्वारा जारी एक अध्यादेश को राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद नेपाल में दशकों से चल रहा कर्मचारी ट्रेड यूनियन ढांचा समाप्त हो गया था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया है।



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