मध्य प्रदेश
04 May, 2026

ऋषि गालव विश्वविद्यालय से ग्वालियर बनेगा शिक्षा का नया केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन में कहा कि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भोपाल, 04 मई।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होते, बल्कि ये राष्ट्र निर्माण की भी मजबूत आधारशिला होते हैं। उन्होंने यह बात ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, ज्ञान और कला का प्रमुख केंद्र रहा है और अब ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ यह प्रदेश के प्रमुख शिक्षा हब के रूप में नई पहचान बना रहा है। यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सशक्त बनाकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 85 वर्ष पूर्व कठिन समय में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया था, जो आज विशाल शैक्षणिक स्वरूप में विकसित हो चुका है, जिसमें कई महाविद्यालय, विद्यालय और खेल संस्थान शामिल हैं तथा हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीक का समन्वय किया जाएगा, जिससे ऐसे विद्यार्थी तैयार होंगे जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के प्रति उत्तरदायी हों।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश में विद्यार्थियों के कौशल, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और सांदीपनि विद्यालय इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोहों की परंपरा में भारतीय वेशभूषा को अपनाया गया है और अब हर विश्वविद्यालय में नियमित रूप से दीक्षांत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि पहले यह लंबे समय तक नहीं होते थे।

उन्होंने बताया कि राज्य में कई विश्वविद्यालय महापुरुषों के नाम पर स्थापित किए गए हैं और सभी जिलों में उत्कृष्ट महाविद्यालयों का विकास किया जा रहा है, जिससे नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा का विस्तार हो सके।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वास्तविक विकास केवल भौतिक संरचनाओं का नहीं बल्कि मनुष्य और उसके परिवेश के समग्र विकास का होता है तथा शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं बल्कि चरित्र निर्माण भी है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य श्रेष्ठ नागरिक तैयार करना रहा है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है।

शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने बताया कि विश्वविद्यालय का फोकस चरित्र निर्माण और रोजगारपरक शिक्षा दोनों पर रहेगा तथा आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन दर्शन पर आधारित पाठ्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय की कक्षाएं आगामी वर्ष से प्रारंभ होंगी और इसे तीन वर्षों में पूर्ण रूप से विकसित किया जाएगा।

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