कोलकाता, 04 मई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना रुझानों में राजनीतिक इतिहास बदलने के संकेत मिल रहे हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी राज्य में पहली बार सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है। वहीं 15 वर्षों से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में करारी हार की स्थिति का सामना करना पड़ता दिख रहा है।
यह चुनाव विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण के बाद हुए पहले चुनाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद मतदान हुआ। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है, जिसमें विपक्ष के नेता बने तृणमूल के पूर्व सहयोगी सुभेंदु अधिकारी भाजपा के प्रमुख चेहरे के रूप में सामने हैं।
इस चुनावी मैदान में कांग्रेस और वाम मोर्चा भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं, जबकि राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ एक नई पार्टी दे रही है, जिसका गठन निलंबित तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने किया है। वे बाबरी नाम पर मस्जिद निर्माण की पहल के बाद सुर्खियों में आए थे और अब चुनावी राजनीति में नया प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।
बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था, जबकि कुछ स्थानों पर पुनर्मतदान और एक सीट पर मतदान स्थगन के बाद प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं, जहां सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत आवश्यक है। किसी भी दल या गठबंधन को सत्ता हासिल करने के लिए यह आंकड़ा पार करना अनिवार्य है। इस बार के चुनाव में किसी स्पष्ट विजेता का अनुमान लगाने में एग्जिट पोल भी असफल रहे हैं।
वर्ष 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटों के साथ भारी जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी थी। उस समय कांग्रेस और वाम दल अपना खाता भी नहीं खोल सके थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन बाद में वे भवानीपुर उपचुनाव से विधानसभा पहुंचीं।
इस बार सुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट को भी राजनीतिक मुकाबले का केंद्र बना दिया है, जिससे मतगणना के दौरान इस सीट पर विशेष नजर बनी हुई है। पूरे राज्य में यह चुनाव विचारधारा, जमीनी राजनीति, विकास और जनकल्याण योजनाओं के वादों के बीच एक तीखी राजनीतिक लड़ाई के रूप में सामने आया है, जिसमें 15 वर्ष पहले वामपंथी गढ़ के पतन के बाद नए राजनीतिक बदलाव की लहर देखी जा रही है।



.jpg)





